अध्यात्म रामायण | Adhyatm Ramayan

By: मुनिलाल - Munilal
अध्यात्म रामायण | Adhyatm Ramayan by


दो शब्द :

इस पाठ में भक्ति और भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन किया गया है। लेखक ने बताया है कि भगवान श्रीराम की भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है और उन पर ध्यान करने से सभी जीवों को मुक्ति मिल सकती है। चाहे कोई नीच जाति का व्यक्ति हो या पुण्यात्मा, सभी को श्रीराम की कृपा से मोक्ष प्राप्त हो सकता है। भगवान की भक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, और यह स्पष्ट किया गया है कि उनके चरणों की सेवा करने से जीवन का उद्धार संभव है। भक्तों का ध्यान भगवान की माधुरी और दिव्यता पर केंद्रित होना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि भगवान की महिमा का बखान बड़े-बड़े ज्ञानी और ऋषि-मुनि भी नहीं कर सकते, क्योंकि उनकी दिव्यता और गूढ़ता को समझना कठिन है। भक्तों को चाहिए कि वे भक्ति में तल्लीन होकर भगवान के नाम का जप करें और अपने मन को सांसारिक वासनाओं से दूर रखें। अंत में, पाठ में भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और भक्ति को सर्वोच्च माना गया है, और यह माना गया है कि उनके नाम का जप और भक्ति सभी पापों को मिटाकर मोक्ष की ओर ले जाती है। इस प्रकार, भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति का महत्व और उनकी कृपा का स्वरूप स्पष्ट किया गया है।


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